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डायबिटीज के प्रकार: आजकल डायबिटीज सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। छोटे बच्चे, युवा और प्रेग्नेंट महिलाएं भी इससे प्रभावित हो रही हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि डायबिटीज सिर्फ एक नहीं, कई तरह की होती है? टाइप 1, टाइप 2 और गर्भकालीन डायबिटीज के अलावा भी कुछ दुर्लभ प्रकार होते हैं। अगर आप डायबिटीज के प्रकार, उनके कारण, लक्षण और बचाव के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।

 पैंक्रियाज और डायबिटीज में गहरा सम्बन्ध है,क्योंकि पेंक्रियाज यानी अग्न्याशय हमारे शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन को बनाता है जो कि बल्ड शुगर यानी ग्लूकोज के स्तर को कंट्रोल करता है अगर अग्न्याशय ( पैंक्रियाज)  सही से काम नहीं करता है तो डायबिटीज ( मधुमेह) होने के संभावना बढ़ जाती है।

डायबिटीज एक गम्भीर समस्या है जिससे न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया लोग इससे परेशान हैं। अभी तक इसका कोई स्थायी इलाज नहीं हुआ है। पिछले लेख में हमने डायबिटीज क्या है, उसके लक्षण, कारण और बढ़ाव के बारे में गहराई से जाना था और आज के इस लेख में हम डायबिटीज के प्रकार और उनसे लक्षण और बचाव के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

डायबिटीज के प्रकार ( Types of Diabetes)

डायबिटीज के प्रकार, कारण,लक्षण और बचाबडायबिटीज के प्रकार मुख्यत 3 हैं।

1. टाइप 1 डायबिटीज ( Type 1 Diabetes)  ( यह ज्यादातर बच्चों ओर युवाओं में होती है ) 

2. टाइप 2 डायबिटीज ( Type 2 Diabetes) ( यह डायबिटीज का सबसे आम प्रकार है और वयस्कों में ज्यादा देखने को मिलता है) 

3. गर्भकालीन मधुमेह ( Gestational Diabetes) ( यह प्रेग्नेंसी के दौरान होती है) 

यह मुख्य डायबिटीज हैं लेकिन इनके अलावा भी कई अन्य दुर्लभ तरह की डायबिटीज भी होती हैं। आज हम उन सभी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

डायबिटीज क्या है? इसके कारण लक्षण और बचाव।

1. टाइप 1 डायबिटीज ( Types 1 Diabetes)

टाइप 1 डायबिटीज

डायबिटीज के प्रकार:  क्या आपने कभी सुना है कि किसी छोटे बच्चे को भी डायबिटीज हो सकती है? जी हां, टाइप 1 डायबिटीज बच्चों और युवाओं में ज्यादा पाई जाती है। इसे ऑटोइम्यून डिजीज भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें हमारा इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर अटैक कर देता है। इससे शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है और ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। टाइप 1 डायबिटीज अक्सर तेजी से विकसित होती है और वजन कम होने या डायबिटिक कीटोएसिडोसिस नामक स्थिति जैसे लक्षण पैदा कर सकती है। डायबिटिक कीटोएसिडोसिस तब होता है। जब आपके पूरे शरीर में बात ज्यादा बल्ड शुगर हो लेकिन इंसुलिन की मात्रा बहुत कम हो या बिल्कुल न हो।

टाइप 1 डायबिटीज के कारण: 

इसके मुख्यत दो कारण हो  करते हैं।

  • जेनेटिक कारण: अगर  परिवार में किसी को भी टाइप 1 डायबिटीज हुआ है तो परिवार में किसी को भी इसके होने की संभावना अधिक हो जाती है ।
  • वायरल संक्रमण: अगर आपके शरीर का इम्युन सिस्टम कमजोर है या आपको किसी तरह का वायरस है तो यह immune system को प्रभावित करता है जिससे टाइप 1 की संभावना अधिक बढ़ जाती है।

टाइप 1 के लक्षण: 

  • अत्यधिक भूख और प्यास लगना 
  • बार बार पेशाब आना 
  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • तेजी से वजन कम होना 

इलाज और बचाव:

  •  टाइ 1  डायबिटीज के लक्षण होने पर इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाएं।
  • हेल्दी डाइट अपनाएं ।
  • नियमित एक्सरसाइज करके भी बल्ड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • समय समय पर बल्ड शुगर की जाँच अवश्य कराए।
  • डॉक्टर के सम्पर्क में रहे,और समय से दवाई लें।

टाइप 2 डायबिटीज ( type 2 Diabetes) इंसुलिन रेजिस्टेंस

टाइप 2 डायबिटीज

“अगर आप ज्यादा मीठा खाते हैं, तो आपको डायबिटीज हो जाएगी!” – ऐसा कई लोग कहते हैं, लेकिन सच यह है कि गलत लाइफस्टाइल, मोटापा और जेनेटिक्स की वजह से टाइप 2 डायबिटीज होती है। यह सबसे आम डायबिटीज है और 40 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा पाई जाती है। हालांकि, आजकल यह युवा और बच्चों में भी देखी जा रही है क्योंकि उनकी फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है।

  अमेरिका में लगभग 10 में से 1 व्यक्ति को टाइप 2 है।  टाइप 2 डायबिटीज गलत खानपान, अनहेल्दी डायट और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण होती है।

टाइप 2 डायबिटीज के कारण: 

  • जेनेटिक कारण 
  • मोटापा अधिक होने पर इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है।
  • अनहेल्दी खान पान 
  • तनाव और खराब लाइफस्टाइल 
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण।

टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण:

  • हाथ पैर में झनझनाहट होना 
  • आंखों से धुंधला दिखाई देना 
  • थकान और कमजोरी महसूस होना 
  • घाव और चोटों का देर से भरना 

इलाज और बचाव: 

  • हेल्दी डाइट अपनाएं, जिसमें फाइबर और प्रोटीन अधिक हो 
  • अपनी डेली लाइफ में एक्सरसाइज और योग जैसी शारीरिक गतिविधियों को शामिल करे रोजाना 30 से 40 मिनट एक्सरसाइज करें।
  • बल्ड शुगर को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर से सलाह लें और दवाएं लें।

गर्भकालीन डायबिटीज ( Gestational Diabetes)

गर्भकालीन डायबिटीज डायबिटीज के प्रकार में गर्भकालीन डायबिटीज भी एक समस्या है गर्भकालीन डायबिटीज गर्भावस्था के दौरान होने वाला एक डायबिटीज है।जिसमें गर्भवती महिलाओं का बल्ड शुगर लेवल सामान्य से अधिक हो जाता है यह आम तौर पर 24वें से 28वें सप्ताह के बीच देखा जाता है और यह डिलीवरी के बाद सामान्य हो सकता है लेकिन अगर इसे नियंत्रित नहीं क्या जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा पैदा कर सकता है ।

गर्भकालीन डायबिटीज के कारण: 

  • हार्मोनल इंबैलेंस: गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा से निकलने वाले हार्मोन इंसुलिन के प्रभाव को कम कर देते हैं जिससे बल्ड शुगर बढ़ जाता है।
  • अनुवांशिक कारण की वजह से 
  • गर्भावस्था के पहले या उसके दौरान मोटापा बढ़ जाने से GDM का खतरा बढ़ जाता है।
  • खराब lifestyle home ke कारण 
  • पहले से हाई बल्ड शुगर होना।

गर्भकालीन डायबिटीज के लक्षण: 

  • बच्चे का गर्भ में असामान्य रूप से बड़ा होना।
  • सामान्यतः इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं।
  • अत्यधिक भूख और प्यास लगना ।
  • बार बार पेशाब आना।
  • थकान और कमजोरी महसूस होना।
  • धुंधला दिखाई देना।

इलाज और बचाव: 

  • ग्लूकोज चैलेंज टेस्ट और ग्लुकोज़ टॉलरेंस टेस्ट कराएं।
  • संतुलित आहार लें।
  • व्यायाम और वॉक करें।
  • डॉक्टर की सलाह से बल्ड शुगर लेवल को नियमित मॉनिटर करें।
  • अगर बल्ड शुगर योग और डाइट से कंट्रोल का हो तो इंसुलिन या दवाएं लेनी पड़ सकती हैं।

कुछ अन्य प्रकार की डायबिटीज

1.सेकेंडरी डायबिटीज: 

यह डायबिटीज किसी तरह की बीमारी या दवाई के सेवन के कारण हो सकती है जैसे किडनी डिजीज, पैंक्रियाज की बीमारी, या स्टेरॉयड दवाओं के अधिक सेवन के कारण।

2. मोनोजेनिक डायबिटीज: 

मोनोजेनिक डायबिटीज यह एक दुर्लभ प्रकार की डायबिटीज है जो जीन म्यूटेशन के कारण होती है। मोनोजेनिक डायबिटीज आम तौर पर बचपन या किशोरावास्था में हो जाती है। यह एक प्रकार से आनुवंशिक होती है ।

निष्कर्ष ( Conclusion)

डायबिटीज, आज के बिजी लाइफस्टाइल में  एक आम समस्या हो गई है। यह हर 10 में से 1 इंसान में देखने को मिलती है लेकिन यह एक गंभीर स्थिति है। लेकिन सही जानकारी और सावधानी अपनाकर इसे रोका जा सकता है।। डायबिटीज और डायबिटीज के कारण लक्षण कारण आदि को जानकर समय पर इनका इलाज करना जरूरी है।

आज हमने डायबिटीज के प्रकार के बारे में गहराई से जाना हमने टाइप 1 और टाइप 2 के बारे में जाना और इसके कुछ अन्य प्रकारों को भी जाना अगर आप डायबिटीज के बारे में ओर जानना चाहते हैं तो हमें कमेंट करें। ओर आपको यह पोस्ट पसंद आई तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करे, जिससे उन्हें डायबिटीज के बारे में जानकारी हो ओर वहबिष्क इलाज के सके। 

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